Monday, November 15, 2010

क़त्ल किया और खुद ही शोर मचा दिया

क़त्ल किया और खुद ही शोर मचा दिया 
दोस्तों ने अपना असली रंग दिखा दिया 
बेगैरत मतलबी धोखेबाज़ फरेबी बेवफा  
देखो कैसे कैसे इल्जाम मुझ पर लगा दिया 
बहुत सोचा मगर ग़ज़ल पूरी न कर सका 
उफ़  मेरे ख्यालो ने मुझे अंगूठा दिखा दिया 
वो खुदा था तो क्यों लगता था इंसान सा 
उसकी हर अदा ने इबादत सीखा दिया 
इश्क करना गर जुर्म हैं तो जवाब दो "कँवल" 
क्यों राधा संग श्याम को मंदिर में सजा दिया 
अरविन्द  मिश्र  "कँवल"

Wednesday, November 10, 2010

क्या हो गया सब को यहाँ ये कैसा कहर हैं 
हर इक के हाथ में पत्थर हैं और मेरा सर हैं 


वो जो खंडहर सी पुरानी हवेली हैं नुक्कड़ पर 
कौन रहता था उस में अब कहाँ उनका बसर हैं 


सुना हैं अब वो फिर से लौट आने वाला हैं 
ऐ खुदा ये कितनी दिलखुश  खबर हैं 


उसने फिर मुद्दतों बाद याद किया तुझे "कँवल"
ये उसकी नवाजिश हैं ये खुदा की मेहर है