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Wednesday, April 27, 2011

कब्र पर दिया

लिख कर तेरा नाम मिटा देता हूँ मैं 
खुद को किस बात की सजा देता हूँ मैं 

सबब आसुओ का कोई पूछे जो मुझसे 
हंस कर तेरा नाम बता देता हूँ मैं 

सजाता हूँ फूल रोज अपने कमरे में 
जाने क्यों फिर उन्हें  हटा देता हूँ मैं 

डरती हूँ अँधेरे से "कँवल" उसने कहा था 
कब्र पर उसकी एक दिया जला देता हूँ मैं 


अरविन्द मिश्र "कँवल"