Wednesday, November 10, 2010

क्या हो गया सब को यहाँ ये कैसा कहर हैं 
हर इक के हाथ में पत्थर हैं और मेरा सर हैं 


वो जो खंडहर सी पुरानी हवेली हैं नुक्कड़ पर 
कौन रहता था उस में अब कहाँ उनका बसर हैं 


सुना हैं अब वो फिर से लौट आने वाला हैं 
ऐ खुदा ये कितनी दिलखुश  खबर हैं 


उसने फिर मुद्दतों बाद याद किया तुझे "कँवल"
ये उसकी नवाजिश हैं ये खुदा की मेहर है 

1 comment:

संजय भास्कर said...

क्या बात है..बहुत खूब....बड़ी खूबसूरती से दिल के भावों को शब्दों में ढाला है.