Tuesday, February 23, 2010

नई ग़ज़ल

आज की रात चाँद सितारों को बुला रखा हैं।
दिल की ज़मीन पे आसमा सजा रखा हैं॥
आओगे न तुम इस महफ़िल में वादा करो ।
तुम्हारे इंतज़ार में दरवाजा खुला रखा हैं॥
मुझको देखकर लोग तेरा नाम लेते हैं।
किस के प्यार ने इसे दीवाना बना रखा हैं
किस रस्ते से जाऊ तो मुझको मिलो तुम ।
इसीलिए अपना हाथ पंडित को दिखा रखा हैं॥
कौन जीतेगा और कौन हारेगा देखना हैं।
दीये तूफान में हमने मुकाबला रखा हैं॥
कुछ न बचा सब कुछ लुटा दिया मैंने।
बची यादो को दाव पे लगा रखा हैं॥


जिन्दगी क्या हैं समझना समझाना क्या हैं।
अगर ये ही जीना है तो मरना क्या हैं ॥
अभी तो आये थे अभी चल भी दिए।
यूँ रोज रोज मिलना बिछड़ना क्या हैं॥
तुम दिल क्या बात आँखों से कहते हैं।
फिर आँख मिलकर चुराना क्या हैं॥
हमने तो अपना सब कुछ सौंप दिया हैं।
अब बार बार मेरे दर पे तेरा आना क्या हैं॥
मेरा आइना हैं तू तेरा आइना हूँ मैं ।
तो उस शीशे में तेरा सजना क्या हैं॥
मौत भी आएगी तो हसंकर मिलुगा में।
रूबरू उपरवाले के तेरा दीवाना क्या हैं॥

1 comment:

. said...

hi arvind......achi gazal hai