Friday, September 3, 2010

छोटी सी जिन्दगी में बहुत काम बाकी हैं

छोटी सी जिन्दगी में बहुत काम बाकी हैं
मुसीबत -इ -मुफलिसी से इंतकाम बाकी हैं

इब्तेदा तो अच्छी हुई नज़रो से नज़ारे मिली उनसे
राह -इ -उल्फत में अभी कई मुकाम बाकी हैं

मदभरी आँखों ने पिला दी सारी महफ़िल को
कौन कहता हैं के महफ़िल -इ -दौर -इ -जाम बाकी हैं

अपनी रूह के टुकड़े कर चूका हैं "कँवल  "
देख लो देखने वालो फिर न कहना अंजाम बाकी हैं

3 comments:

Sunil Kumar said...

अरविद जी आपके शेर बहुत अच्छे है लेकिन साडी की जगह सारी कर लें , बधाई

ARVIND said...

धन्यवाद सुनील जी आपने सुधार करवायाँ । और आपकी प्रतिक्रिया के लिए भी धन्यवाद ।

Anshul said...

Wondrful dude ...

बात दिल तक पहुच गयी आपकी .... :-)