Thursday, March 25, 2010

तेरे दामन पर गिरा क़र आंसू आज रोने दे ।
कई रातों से सोया नहीं आज जी भर सोने दे॥
रोके रास्ता खड़ी हैं मेरा मौत न जाने कब से,
दो पल ही हैं तेरी बाँहों में फ़न्हा होने दे ॥
क्या बात हैं क्यूँ आसू हैं तेरी आँखों में ।
बुला रहा हैं उस जहाँ में कोई ,मुझे जाने दे॥
अब गर जिन्दा रहा तो जीने नहीं देगीं दुनिया,
इस गमे दुनिया से दूर नई दुनिया बनाने दे॥
गम न करना सदा खुश रहना मेरे बगैर ,
मुस्कुराते क़र विदा ,मेरे यारो को जनाजा उठाने दे।

6 comments:

वीनस केशरी said...

अरविन्द जी
आपकी रचना के भाव बहुत पसंद आये
मगर फिर देखा आपने इस पर गजल का लेबल लगाया हुआ है
दरअसल गजल लिखने के लिए रदीफ, काफिया, बहर आदि कुछ नियम होते है जिनका निर्वहन किये बिना कोई रचना गजल नहीं होती

आशा है आप कमेन्ट को अन्यथा नहीं लेंगे

karishma said...

Arvind ji bhot hi badhiya...........

kshama said...

अब गर जिन्दा रहा तो जीने नहीं देगीं दुनिया,
इस गमे दुनिया से दूर नई दुनिया बनाने दे॥
गम न करना सदा खुश रहना मेरे बगैर ,
मुस्कुराते क़र विदा ,मेरे यारो को जनाजा उठाने दे।
Uff! Kitna dard samete hue hai yah rachna!
Dua karti hun, aapke jeevan me sada bahar rahe!

भूतनाथ said...

theek likhte ho bhaiya....aur gaharaa karnaa hoga.....aur aur sahi bhi...

SHRUTI said...

BAHUT KHOOB

kshama said...

Aaj aapki yah rachana phirse padhneka man kiya!